H 1 register के बारे में होने वाली गलतफहमी क्या है? वो जानिए
अगर आप एक मेडिकल स्टोर चलाते हैं या नया फार्मा बिजनेस शुरू कर रहे हैं, तो आपको Purchase Register और H1 Register के बीच का अंतर पता होना बहुत जरूरी है। कई बार सही जानकारी न होने की वजह से ड्रग इंस्पेक्टर की रेड में भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि ये दोनों रजिस्टर क्यों जरूरी हैं और इन्हें कैसे मेंटेन किया जाता है।
1. Purchase Register (परचेज रजिस्टर) क्या है?
परचेज रजिस्टर वह रिकॉर्ड है जिसमें आप अपनी दुकान के लिए खरीदी गई हर एक दवाई का हिसाब रखते हैं। जब आप किसी होलसेलर या डिस्ट्रीब्यूटर से माल खरीदते हैं, तो उस बिल की एंट्री इस रजिस्टर में होती है।
इसमें क्या जानकारी होती है? बिल नंबर, सप्लायर का नाम, दवाई का नाम, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और क्वांटिटी (मात्रा)।
जरूरी क्यों है? यह रजिस्टर यह साबित करता है कि आपने दवाई सही और लीगल तरीके से खरीदी है।
2. Schedule H1 Register क्या है?
यह रजिस्टर बहुत ही संवेदनशील होता है। भारत सरकार के नियमों के अनुसार, कुछ खास दवाइयां (जैसे: Antibiotics, Anti-Tuberculosis drugs, और नशीली दवाइयां) Schedule H1 की कैटेगरी में आती हैं।
इसमें क्या जानकारी होती है? मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम, दवाई का नाम, मात्रा (Quantity) और बिक्री की तारीख।
जरूरी क्यों है? इन दवाइयों का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए सरकार इनका कड़ा हिसाब रखती है। इस रजिस्टर को कम से कम 3 साल तक संभाल कर रखना अनिवार्य है।
Seducale H1 रजिस्टर कैसे बनाते है यह जानिए
Purchase Register vs H1 Register: मुख्य अंतर
Purchase Register Schedule H1 Register
मकसद दुकान में आए पूरे स्टॉक का हिसाब। खास दवाओं (H1) की बिक्री का हिसाब।
एंट्री कब होती है? जब माल दुकान में आता है (खरीद के समय)। जब दवाई ग्राहक को बेची जाती है।
कौन सी दवाएं? सभी दवाइयां (Tablets, Syrups, आदि)। सिर्फ Schedule H1 वाली दवाएं।

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